बारिश की बूँदें फिर से टपक रही थीं। मंदिर की घंटियाँ, फूलों की खुशबू, और पंडित की मंत्रोच्चार के बीच राधा लाल जोड़े में बैठी थी। माथे पर सिंदूर की हल्की रेखा, और आंखों में एक चमक — जैसे सावन फिर से उसी रात को दोहरा रहा हो।

अर्जुन ने उसका हाथ थामा, और उसे मंगल्य-सूत्र पहनाते हुए धीमे से कहा,
“अब तू सिर्फ राधा नहीं, मेरी राधा है…”

विवाह की अग्नि के चारों ओर

जब फेरों के दौरान चौथा फेरा पूरा हुआ — वो जिसमें धर्म, काम, मोक्ष के बाद प्रेम की बारी आती है — अर्जुन ने उसके कान में धीरे से फुसफुसाया,
“इस फेरे में मैंने सिर्फ वचन नहीं, अपना वजूद रखा है…”

राधा ने आंखें झुका लीं — पर होंठों पर हल्की मुस्कान आ गई।
शब्दों से कहीं ज़्यादा, अब दोनों एक-दूसरे की सांसों में विश्वास पढ़ने लगे थे।

रात की पहली सांस

शादी की भीड़भाड़ के बाद, जब दरवाज़ा बंद हुआ, और कमरे में सिर्फ दीपक की लौ और खामोशी बची — राधा बिस्तर के किनारे बैठी थी, पायल की रुनझुन जैसी धीमी-धीमी धड़कनों के साथ।

अर्जुन ने धीरे से उसका घूंघट उठाया।

“थक गई हो?” उसने पूछा।

“प्यार से कोई थकता है क्या?” राधा ने मुस्कुरा कर जवाब दिया।

अर्जुन ने उसकी कलाई थामी — और उसकी मेंहदी पर उंगली फिराते हुए बोला,
“यहाँ से शुरू करूँ… या दिल से?”

प्रेम का पहला अध्याय – विवाह के बाद

उनके बीच की खामोशी अब संकोच नहीं, संवाद थी।
राधा की साड़ी अब अस्त-व्यस्त होने लगी थी, लेकिन उसकी आँखों की शर्म अब इज़हार बन चुकी थी।

“तुम बदल तो नहीं जाओगे?” राधा ने एक पल को पूछा।

“अगर तुम्हारा प्यार वैसा ही रहा, तो मैं क्यों बदलूंगा?” अर्जुन ने कहा।

राधा ने उसकी बात का जवाब अपने होंठों से दिया — और अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए।

देह की नहीं, रूह की एकता

राधा की मांग से सिंदूर पसीने में घुल चुका था, लेकिन उसके माथे पर चमक थी। अर्जुन अब धीरे-धीरे उसका चेहरा अपनी हथेलियों में लेकर सिर्फ देह को नहीं, उस स्त्री को महसूस कर रहा था — जिसे वो जीवन भर समझना चाहता था।

राधा ने उसकी पीठ पर हाथ फिराते हुए कहा,
“अब मुझे छूते हुए डर नहीं लगता। अब ये छुअन पूजा लगती है…”

और उस रात, उनकी पहली मिलन कथा शुरू हुई —
जैसे दो आत्माएं एक मौसम में मिलें, सावन की पहली बारिश में भीगती हुई…

शादी की रात, अक्सर रस्मों की थकावट के नीचे दब जाती है।
पर राधा और अर्जुन के लिए — ये रात, एक सावन का वादा थी।

अब वे सिर्फ प्रेमी नहीं थे, बल्कि साथ जीने का प्रण लेने वाले दो जीवन थे।
हर बारिश अब उनकी कहानी कहेगी — एक घूंघट के नीचे मुस्कुराती राधा, और उसके माथे पर अर्जुन के प्यार की लौ

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